69000 शिक्षक भर्ती पर रविश कुमार की ग्राउंड रिपोर्ट | अब तक क्या हुआ केस में कितनी सुनवाई और कितना समय

868
views

प्राइम टाइम लोक पत्र संभाग- हैं 69000 मगर सरकार को ज़ीरो नज़र आते हैं

जब सरकारें सांप्रदायिकता को राष्ट्रवाद की चिमचिमी में लपेट कर बेचने लगें तो उसकी मार युवाओं पर पड़ती है। वहीं युवा जो एक समुदाय के प्रति अपनी नफ़रत को अमृत समझ लेते हैं। वरना यूपी का नौजवान वहाँ हुई पुलिस बर्बरता के ख़िलाफ़ बोलता। कुछ ने तो फ़र्ज़ निभाया होगा लेकिन ज़्यादातर की चुप्पी बताती है कि वे इससे बाहर नहीं निकलना चाहते हैं। यूपी बिहार के नौजवानों को इस हाल में देख कर दुख होता है। युवाओं को अपना हिसाब करना चाहिए। इस ज़हर से उन्हें क्या मिला? आज यूपी के नौजवानों का किरदार क्या रह गया? अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पर क़हर बरपा मगर वो चुप रहा। क्या उसकी चुप्पी सांप्रदायिक आधार पर नहीं थी? और इससे क्या श्रावस्ती या गोरखपुर के कालेजों का स्तर बहुत अच्छा हो गया?

शशि सिंह ने कहा कि इसे पोस्ट कर दीजिए। सोचिए 69000 लोग किसी भाजपा नेता की रैली में आ जाएँ तो आई टी सेल तीन दिन तक फ़ोटो ट्रेंड कराएगा मगर इतनी ही संख्या के नौजवान उसके लिए ज़ीरो हो जाते हैं जब वे नौकरी की बात करते हैं।

मैं साफ़ साफ़ इन युवाओं को समझने लगा हूँ। ये एक तरह से अपनी पोलिटिक्स के विक्टिम भी है और दूसरी तरह से उसी पोलिटिक्स के चलते आक्रांता भी। हमलावर भी। मैं साफ़ साफ़ कहता हूँ मुझे कम्युनल जमात का हीरो नहीं बनना है। मैं ज़ीरो ही ठीक हूँ। हिन्दी प्रदेश के युवा वाकई मुझे निराश करते हैं।

मैं कई बार कह चुका हूँ दो साल तक लगातार नौकरी सीरीज़ करने के बाद इसे बंद कर चुका हूँ। पुराने पोस्ट में विस्तार से कारण बता चुका हूँ। फिर भी शशि सिंह के कहने पर पोस्ट कर रहा हूँ।

उन्होंने 690000 शिक्षक भर्ती की जो लिस्ट बनाई है उसे देखिए। आप पढ़ते हुए हाँफने लग जाएँगे। हिन्दू राष्ट्र के नाम पर तो लोग उछलते हुए आ जाते हैं लेकिन बता दो भाई कि इस हिन्दू राष्ट्र में युवाओं को ये सब भुगतना होगा ? शर्मनाक है।

देखिए इन युवाओं के साथ क्या मज़ाक़ हो रहा है। अगर इसे पढ़ कर आप रो नहीं सकते तो मतलब आप ज़िंदा नहीं हैं।

#69000_शिक्षक_भर्ती – एक पनौती

6 जनवरी 2019 को परीक्षा हुई । बेसिक शिक्षा सचिव प्रभात कुमार द्वारा की गई जियो में गड़बड़ी को लेकर 11 जनवरी को शिक्षामित्र कोर्ट गए । सरकार सिंगल बेंच में हार गई ।

सिंगल बेंच के आर्डर के खिलाफ 22 मई को सरकार डिवीजन बेंच गई । जस्टिस पंकज कुमार जायसवाल व जस्टिस इरशाद अली जी बेंच में सुनवाई शुरू हुई,

और फिर चला तारीखों का सिलसिला –

29 मई को एजी महोदय की अनुपस्थिति की वजह से बहस नहीं ।

जून – ग्रीष्मकालीन अवकाश, कोर्ट बंद ।

8 जुलाई – एजी अनुपस्थित, तारीख

18 जुलाई – एजी अनुपस्थित, कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई ।

2 अगस्त – एजी फिर भी गायब ।

19 अगस्त – वकीलों की हड़ताल के चलते सुनवाई नहीं हुई ।
22 अगस्त -योगी मंत्रीमंडल विस्तार , नए बेसिक शिक्षा मंत्री श्री सतीश द्विवेदी जी बनाए गए ।

27 अगस्त – महाधिवक्ता की अनुपस्थिति को लेकर लखनऊ में अभ्यर्थी धरने पर ।

28 अगस्त – नए बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी जी ने आश्वासन दिया कि अगली तारीख पर एजी उपस्थित रहेंगे ।

5 सितंबर – कोर्ट की तारीख , एजी फिर भी अनुपस्थित ।

11-12 सितंबर – एजी की अनुपस्थिति को लेकर लखनऊ में अभ्यर्थी दोबारा धरने पर, पुलिस ने धरना स्थल से अभ्यर्थियों को खदेड़ा ।

16 सितंबर – प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर #69000TeacherVacancy पूरे दिन ट्वीटर पर ट्रेंड करता रहा लेकिन डिजिटल इंडिया वालों को दिखाई न दिया ।

19 सितंबर – रोस्टर चेंज । नए जज साहब का आगमन ।

24 सितंबर – अंततः एजी प्रकट हुए । जज साहब ने कहा कि अब रोजाना होगी सुनवाई ।

26 सितंबर – बहस ।

27 सितंबर – बहस । अगली तारीख 1 अक्टूबर, यानी रोजाना बहस की उम्मीद खत्म ।

1 अक्टूबर – जज साहब सलमान खुर्शीद का केस सुनने चले गए । 69000 प्राथमिकता में नहीं ।

16 अक्टूबर – बहस ।

22 अक्टूबर – बहस ।

26 अक्टूबर – रोस्टर बदला । जस्टिस इरशाद अली की जगह नए जज आलोक कुमार माथुर का आगमन ।

6 नवम्बर – नए जज साहब आलोक कुमार माथुर जी केस सुनना नहीं चाह रहे थे, स्पेशल बेंच गठन का प्रस्ताव दिया ।

20 नवंबर – स्पेशल बेंच गठित । इरशाद अली जी दोबारा केस से जुड़े ।

26 नवम्बर – बहस ।

5 दिसंबर – जस्टिस इरशाद अली जी अन्य कोर्ट में व्यस्त, अगली तारीख ।

9 दिसम्बर 2019 – जस्टिस इरशाद अली जी छुट्टी पर ।

20 दिसम्बर 2019 – रोस्टर की वजह से जस्टिस इरशाद अली जी लखनऊ बेंच से प्रयागराज बेंच में ट्रांसफर । (रोस्टर चेंज को लेकर अभी आधिकारिक नहीं )

फिर तब से लेकर 3 जनवरी तक केस लिस्टेड ही नहीं हुआ ।
अब वही 6 जनवरी आ रही है ।

69000 की परीक्षा हुए एक साल हो गए लेकिन अभ्यर्थी अबतक नियुक्ति से दूर हैं । योगी जी ने बोला था कि इस भर्ती को रिकॉर्ड समय में पूरा करेंगे, रिकॉर्ड तो बन रहा है लेकिन कम समय में पूरे होने का नहीं, सबसे ज्यादा समय में पूरे होने का ।

आर्थिक रूप से परेशान कई अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की राह देखते-देखते आत्महत्या तक कर ली लेकिन सरकार की कुम्भकर्णी निद्रा नहीं टूट रही । सरकार चाहे तो अदालत से प्रे करके रोजाना सुनवाई करा सकती है लेकिन भर्ती को 2022 चुनाव तक खींचना भी तो है ।