लाल बहादुर शास्त्री के बारे में रोचक तथ्य – Amazing Facts about Lal Bahadur Shastri in Hindi

आज लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती है इस अवसर पर ऐसी महान आत्मा को सत् सत् नमन

Amazing Facts about Lal Bahadur Shastri in Hindi – लाल बहादुर शास्त्री के बारे में रोचक तथ्य

लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर हम आपको उनके जीवन की सरलता, ईमानदारी और सादगी से भरे कुछ अनकहे किस्से बता रहे हैं:-

देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 11 जनवरी को पुण्यतिथि है. जय जवान जय किसान का नारा देने वाले शास्त्री जी ने अपने कार्यकाल के दौरान देश को कई संकटों से उबारा. साफ-सुथरी छवि के कारण उनका बहुत सम्मान किया जाता था. 

Lal Bahadur Shastri Interesting Facts in Hindi

Lal Bahadur Shastri in Hindi पढ़कर आपको भी पता लग जाएगा कि शास्त्री जी कितने महान इंसान थे। भारत के सफलतम प्रधानमंत्रियों में एक श्री लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर सन 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। लाल बहादुर शास्त्री की स्वच्छ छवि के कारण 27 मई, 1964 को नेहरू जी के मृत्यु के बाद शास्त्री जी को देश की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने आजाद भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर संभाली। 11 जनवरी, 1966 में ताशकंद में उनका निधन हो गया था। यहां हम लालबहादुर शास्त्री से जुड़े कुछ रोचक तथ्य बताएंगे जो आपने आज तक नहीं पढ़े होंगे:

1. 9 साल की जेल

भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में देश के दूसरे प्रधानमंत्री 9 साल तक जेल में रहे. असहयोग आंदोलन के लिए पहली बार वह 17 साल की उम्र में जेल गए, लेकिन बालिग न होने की वजह से उनको छोड़ दिया गया. इसके बाद वह सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिए 1930 में ढाई साल के लिए जेल गए. 1940 और फिर 1941 से लेकर 1946 के बीच भी वह जेल में रहे. शास्त्री जी ने अपने जीवन के  नौ साल जेल में बिताए.

2. आम लाने पर पत्नी का विरोध

स्वतंत्रता की लड़ाई में जब वह जेल में थे तब उनकी पत्नी चुपके से उनके लिए दो आम छिपाकर ले आई थीं. इस पर खुश होने की बजाय उन्होंने उनके खिलाफ ही धरना दे दिया. शास्त्री जी का तर्क था कि कैदियों को जेल के बाहर की कोई चीज खाना कानून के खिलाफ है.

3. दहेज में ली खादी

शास्त्री जी जात-पात के सख्त खिलाफ थे. तभी उन्होंने अपने नाम के पीछे सरनेम नहीं लगाया. शास्त्री की उपाधि उनको काशी विद्यापीठ से पढ़ाई के बाद मिली थी. वहीं अपनी शादी में उन्होंने दहेज लेने से इनकार कर दिया था. लेकिन ससुर के बहुत जोर देने पर उन्होंने कुछ मीटर खादी के कपड़े  दहेज के तौर पर लिए थे. 

4. शास्त्री जी के सिर से पिता का साया काफी कम उम्र में ही उठ गया था। पढ़ने में कुशाग्र बुद्धि होने के कारण उन्होंने नाना-नानी के यहां रहकर प्राथमकि शिक्षा पूरी की। आर्थिक तंगी के कारण वो नदी तैरकर स्कूल में पढ़ाई करने जाते थे।

5. उनके पिता जी का नाम शारदा श्रीवास्तव प्रसाद और माता जी का नाम रामदुलारी देवी था। उनकी दो बहनें थीं। शास्त्री जी के पोते यानी अनिल शास्त्री के बेटे आदर्श शास्त्री ने 2014 में एप्पल कंपनी में अपनी अच्छी-खासी जॉब छोड़कर आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली।

6. काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि मिलते ही जन्म से चले आ रहे जातिसूचक शब्द श्रीवास्तव को हटा कर अपने नाम के आगे हमेशा के लिए शास्त्री लगा लिया।

7. 16 मार्च 1928 को उनकी शादी मिर्जापुर के ललिता देवी से हुई थी और उन्होंने दहेज के तौर पर एक चरखा और कुछ गज कपड़ा लिया था।

8. स्वतन्त्रता के पश्चात उनको उत्तर प्रदेश के संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था। गोविंद बल्लभ पंत के मंत्रिमंडल में परिवहन मंत्री के कार्यकाल में उन्होंने पहली बार महिला कंडक्टर्स की नियुक्ति की थी।

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9. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठी की जगह पानी की बौछार का प्रयोग उन्होंने ही आरंभ किया था।

10. बहुत कम लोग ये बात जानते हैं कि परिवहन में जो आप महिलाओं के लिए आरक्षित सीट देखते हैं उनकी शुरुआत भी लाल बहादुर शास्त्री ने की थी.

11. शास्त्री जी की देन थी रेलवे में थर्ड क्लास। उन्होंने फर्स्ट क्लास और थर्ड क्लास के किराया में काफी अंतर कर दिया था। इससे कमजोर तबके के लोगों को बड़ी राहत मिली थी। एक रेल दुर्घटना के बाद उन्होंने 1956 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. यह उनकी मानवता का एक उदाहरण था.

12. भगत सिंह के जीवन पर बनी फ़िल्म ‘शहीद’ देखकर तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री रो पड़े थे.

13. सफेद क्रांति/दुग्ध क्रांति को लाल बहादुर शास्त्री ने ही अपने कार्यकाल में बढ़ावा दिया था। आनंद, गुजरात के अमूल दूध कॉपरेटिव के साथ मिलकर राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की स्थापना की।

14. 1964 में जब शास्त्री जी देश के प्रधानमंत्री बने तब अमेरिका से अनाज मंगाया जाता था और 1965  में युद्ध के दौरान भारत सूखे की मार झेल रहा था तो अमेरिका ने गेहूँ देने से मना कर दिया तब शास्त्री जी ने कहा नही चाहिए हमे तुम्हारें गले-सड़े गेहूँ.. और देशवासियों से अपील की कि हफ्ते में एक दिन उपवास रखे ताकि अनाज की कम लागत हो.

15. पाकिस्तान ने 1965 में यह सोचकर भारत पर हमला किया कि 1962 में चीन से लड़ाई के बाद भारत की ताकत कमजोर हो गई होगी, जब राष्ट्रपति ने आपात बैठक बुलाई और तीनों सेनाध्यक्ष ने कहा कि हमें बताइये कि अब क्या करना है तो शास्त्री जी का तत्काल उत्तर था कि आप देश की रक्षा कीजिए और हमें बताइये कि क्या करना है। शास्त्री जी के नेतृत्व में भारत ने पाक को कड़ी शिकस्त दी।

16. लाल बहादुर शास्त्री की दूरदर्शिता काबिले तारीफ थी। युद्ध के दौरान पंजाब के रास्ते लाहौर में सेंध लगाकर पाकिस्तान को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया।

17. “जय जवान-जय किसान” का नारा शास्त्री जी ने दिया था। इससे भारत की जनता का मनोबल बढ़ा और देश एकजुट हो गया।

18. जय जवान जय किसान की कहानी

1964 में जब वह प्रधानमंत्री बने तब देश में खाने कई चीजें आयात करनी पड़ती थी.1965 में पाकिस्तान से जंग के दौरान देश में भयंकर सूखा पड़ा. तब उन्होंने देशवासियों से एक दिन का उपवास रखने की अपील की. उन्होंने कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए ‘जय जवान जय किसान’ का नारा दिया.

19. महिलाओं को जोड़ा ट्रांसपोर्ट सेक्टर से

ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर के तौर पर सबसे पहले उन्होंने ही इस इंडस्ट्री में महिलाओं को बतौर कंडक्टर लाने की शुरुआत की. यही नहीं

20. क्या वह वाकई हार्ट अटैक था?

पाकिस्तान के साथ 1965 की जंग को खत्म करने के लिए वह समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए ताशकंद गए थे. इसके ठीक एक दिन बाद जनवरी 1966 को खबर आई कि हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई है. उनकी मौत के बाद आज भी इस पर संदेह बरकरार है. उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी ललीता शास्त्री ने दावा किया कि उनके पति को जहर देकर मारा गया. उनके बेटे सुनील शास्त्री ने सवाल ने कहा था कि उनके पिता की बॉडी पर नीले निशान थे. साथ ही उनके शरीर पर कुछ कट भी थे.

21. खाने में मिला था जहर!

दूसरी ओर, कुछ लोग दावा करते हैं कि जिस रात शास्त्री की मौत हुई, उस रात खाना उनके निजी सहायक रामनाथ ने नहीं, बल्कि सोवियत रूस में भारतीय राजदूत टीएन कौल के कुक जान मोहम्मद ने पकाया था. खाना खाकर शास्त्री सोने चले गए थे. उनकी मौत के बाद शरीर के नीला पड़ने पर लोगों ने आशंका जताई थी कि शायद उनके खाने में जहर मिला दिया गया था. उनकी मौत 10-11 जनवरी की आधी रात को हुई थी.

22. शास्त्री जी की मृत्यु आज तक एक रहस्य बनी हुई है. ताशकन्द समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद चीन में हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई. उनके इस अकस्मात निधन ने कई सवाल खड़े किए. उनके घर वाले और मानते थे कि उनकी हत्या ज़हर देकर की गई थी. अगर उस दिन पोस्टमार्टम हो गया होता तो सारी सच्चाई सामने आ जाती लेकिन ऐसा नही हो सका. शास्त्रीजी को उनकी सादगी, देशभक्ति और ईमानदारी के लिए आज भी पूरा भारत श्रद्धापूर्वक याद करता है। उन्हें मरणोपरान्त वर्ष 1966 में भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया।

23- बनारस के हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज में हाईस्कूल की पढ़ाई के दौरान उन्होंने साइंस प्रैक्टिकल में इस्तेमाल होने वाले बीकर को तोड़ दिया था. स्कूल के चपरासी देवीलाल ने उनको देख लिया और उन्‍हें जोरदार थप्पड़ मार दिया. रेल मंत्री बनने के बाद 1954 में एक कार्यक्रम में भाग लेने आए शास्त्री जब मंच पर थे, तो देवीलाल उनको देखते ही हट गए. शास्त्री ने भी उन्हें पहचान लिया और देवीलाल को मंच पर बुलाकर गले लगा लिया.

24- जन्‍म से वर्मा लाल बहादुर शास्‍त्री जाति प्रथा के घोर विरोधी थे. इसलिए उन्‍होंने कभी भी अपने नाम के साथ अपना सरनेम नहीं लगाया. उनके नाम के साथ लगी ‘शास्‍त्री’ की उपाधि उन्‍हें काशी विद्यापीठ की तरफ से मिली थी.

25- बनारस में पैदा हुए शास्‍त्री का स्‍कूल गंगा की दूसरी तरफ था. उनके पास गंगा नदी पार करने के लिए फेरी के पैसे नहीं होते थे. इसलिए वह दिन में दो बार अपनी किताबें सिर पर बांधकर तैरकर नदी पार करते थे और स्कूल जाते थे.

26- कहा जाता है कि शास्त्री फटे कपड़ों से बाद में रुमाल बनवाते थे. फटे कुर्तों को कोट के नीचे पहनते थे. इस पर जब उनकी पत्नी ने उन्हें टोका, तो उनका कहना था कि देश में बहुत ऐसे लोग हैं, जो इसी तरह गुजारा करते हैं.

27 -शास्‍त्री सादा जीवन में विश्‍वास रखते थे. प्रधानमंत्री होने के बावजूद उन्‍होंने अपने बेटे के कॉलेज एडमिशन फॉर्म में अपने आपको प्रधानमंत्री न लिखकर सरकारी कर्मचारी लिखा. उन्‍होंने कभी अपने पद का इस्तेमाल परिवार के लाभ के लिए नहीं किया.

28-उनके बेटे ने एक आम इंसान के बेटे की तरह रोजगार के लिए खुद को रजिस्‍टर करवाया था. एक बार जब उनके बेटे को गलत तरह से प्रमोशन दे दिया गया, तो शास्‍त्री जी ने खुद उस प्रमोशन को रद्द करवा दिया.

29 -लाल बहादुर शास्त्री इतने र्इमानदार थे कि उन्‍होंने कभी भी प्रधानमंत्री के तौर पर उन्‍हें मिली हुई गाड़ी का निजी काम के लिए इस्‍तेमाल नहीं किया.

30- शास्त्री किसी भी प्रोग्राम में वीवीआईपी की तरह नहीं, बल्कि एक आम इंसान की तरह जाना पसंद करते थे. प्रोग्राम में उनके लिए तरह-तरह के पकवानों का इंतजाम किया जाता था. लेकिन, शास्त्री कभी नहीं खाते थे. उनका कहना था कि गरीब आदमी भूखा सोया होगा और मै मंत्री होकर पकवान खाऊं, ये अच्छा नहीं लगता. दोपहर के खाने में वे अक्सर सब्जी-रोटी खाते थे.

31 -शास्त्री ने युद्ध के दौरान देशवासियों से अपील की थी कि अन्न संकट से उबरने के लिए सभी देशवासी सप्ताह में एक दिन का व्रत रखें. उनके अपील पर देशवासियों ने सोमवार को व्रत रखना शुरू कर दिया था.

32- प्रधानमंत्री बनने के बाद शास्त्री पहली बार काशी अपने घर आ रहे थे. उनके घर तक जाने वाली गलियां काफी संकरी थीं, जिस कारण उनकी गाड़ी वहां तक नहीं पहुंच पाती. ऐसे में पुलिस-प्रशासन ने गलियों को चौड़ा करने का फैसला किया. यह बात शास्त्री को मालूम हुई, तो उन्होंने आदेश दिया कि गलियों को चौड़ा करने के लिए किसी भी मकान को तोड़ा न जाए. वह पैदल ही घर जाएंगे.

33- लाल बहादुर शास्त्री ने स्वतंत्रता आंदोलन में अहम योगदान दिया और आजादी के बाद भारत के नीति निर्माताओं में से एक रहे. भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट में वो शामिल हुए. उन्होंने रेलवे और गृह जैसे बड़े और अहम मंत्रालय का प्रभार संभाला. जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद जून 1964 में लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने.

34- लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को हुआ था. पहले उनका नाम लाल बहादुर वर्मा था. वाराणसी के काशी विद्यापीठ से ग्रैजुएशन करने के बाद उनके नाम में शास्त्री टाइटल जुड़ा.

35-लाल बहादुर शास्त्री अपनी ईमानदारी के लिए मशहूर थे. उन्होंने अपने कार्यकाल में भ्रष्टाचार से निपटने के लिए एक कमिटी बनाई थी. करप्शन से जुड़े सवाल पर उन्होंने अपने बेटे तक को नहीं बख्शा. एक बार उन्हें पता चला कि उनके बेटे को गलत तरीके से प्रमोशन मिल रहा है. उन्होंने अपने बेटे की प्रमोशन रुकवा दी.

36- शास्त्रीजी की विनम्रता के कायल थे लोग

लाल बहादुर शास्त्री की विनम्रता के लोग कायल थे. उनके साथ प्रेस एडवाइजर के तौर पर काम करने वाले मशहूर पत्रकार कुलदीप नैय्यर ने उनके बारे में एक दिलचस्प किस्सा सुनाया. कुलदीप नैय्यर ने बताया कि शास्त्री जी इतने विनम्र थे कि जब भी उनके खाते में तनख्वाह आती, वो उन्हें लेकर गन्ने का जूस बेचने वाले के पास जाते. शास्त्री जी शान से कहते- आज जेब भरी हुई है. फिर दोनों गन्ने का जूस पीते.

37- शास्त्री जी अपनी तनख्वाह का अच्छा खासा हिस्सा सामाजिक भलाई और गांधीवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने में खर्च किया करते थे. इसलिए अक्सर उन्हें घर की जरूरतों के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता था. घर का बजट बड़ा संतुलित रखना पड़ता था.

38- जब शास्त्रीजी ने पीएनबी बैंक से लिया कार लोन

शास्त्री जी के लोन लेकर कार खरीदने का किस्सा बड़ा मशहूर है. लाल बहादुर ईमानदारी और सादगीभरा जीवन व्यतीत करते थे. दूसरे सामाजिक कार्यों में पैसे खर्च करने के वजह से अक्सर उनके घर पैसों की किल्लत रहा करती थी. उनके प्रधानमंत्री बनने तक उनके पास खुद का घर तो क्या एक कार भी नहीं थी.

ऐसे में उनके बच्चे उन्हें कहते थे कि प्रधानमंत्री बनने के बाद आपके पास एक कार तो होनी चाहिए.

घरवालों के कहने पर शास्त्रीजी ने कार खरीदने की सोची. उन्होंने बैंक से अपने एकाउंट का डिटेल मंगवाया. पता चला कि उनके बैंक खाते में सिर्फ 7 हजार रुपए पड़े थे. उस वक्त कार की कीमत 12000 रुपए थी.

39- कार खरीदने के लिए उन्होंने बिल्कुल आम लोगों की तरह पंजाब नेशनल बैंक से लोन लिया. 5 हजार का लोन लेते वक्त शास्त्रीजी ने बैंक से कहा कि जितनी सुविधा उन्हें मिल रही है उतनी आम नागरिक को भी मिलनी चाहिए.

40- हालांकि शास्त्रीजी कार का लोन चुका पाते उसके एक साल पहले ही उनका निधन हो गया. उनके निधन के बाद प्रधानमंत्री बनी इंदिरा गांधी ने लोन माफ करने की पेशकश की. लेकिन शास्त्री जी की पत्नी ललिता शास्त्री नहीं मानी और शास्त्री जी की मौत के चार साल बाद तक कार की ईएमआई देती रहीं. उन्होंने कार लोन का पूरा भुगतान किया.

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